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विक्रम विवि : पांच साल में बढ़े 30 हजार विद्यार्थी, परीक्षाएं दो माह लेट
उज्जैन । विक्रम यूनिवर्सिटी में पिछले पांच सालों में विद्यार्थियों की संख्या तो बढ़ी लेकिन परीक्षा संचालन आैर रिजल्ट की व्यवस्थाएं बेपटरी हो गई। नतीजा कई कोर्सेस में विद्यार्थी पिछड़ गए हैं। बीते पांच सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो विद्यार्थियों की संख्या में 40 फीसदी का इजाफा हुआ परंतु यूनिवर्सिटी प्रशासन समय पर परीक्षाएं कराने आैर नतीजे देने के मामले में कई कोर्सेस में पीछे चल रहा है। पाठ्यक्रमों के आधार पर इसकी वजह भी अलग-अलग है लेकिन इन व्यवस्थाओं के बीच विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं। कई कोर्सेस में एक साल में दो सेमेस्टर पूरे करने का सपना भी अब भी सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए अधूरा है। रिजल्ट प्रोसेसिंग करने वाली कंपनियों में बदलाव, रिजल्ट में देरी, कई कोर्सेस में एक ही विषय में विद्यार्थियों के फेल होने के मामले परीक्षा में देरी के सबसे बड़े कारण हैं। जिम्मेदारों का कहना है परीक्षा संचालन आैर समय पर रिजल्ट देने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
परीक्षा संचालन एवं परीक्षा परिणाम समयबद्ध
प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों की तुलना में विक्रम यूनिवर्सिटी में परीक्षा संचालन एवं परीक्षा परिणाम समयबद्ध है। अपरिहार्य कारणों से कुछ परीक्षाओं में विलंब हो सकता है। उन्हें भी समय पर लाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
– प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा, कुलानुशासक, विक्रम यूनिवर्सिटी